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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

सच है उम्र भर किस का कौन साथ देता है
ग़म भी हो गया रुख़्सत दिल को छोड़ कर तन्हा

अनवर शऊर




'शुऊर' ख़ुद को ज़हीन आदमी समझते हैं
ये सादगी है तो वल्लाह इंतिहा की है

अनवर शऊर




'शुऊर' सिर्फ़ इरादे से कुछ नहीं होता
अमल है शर्त इरादे सभी के होते हैं

अनवर शऊर




'शुऊर' तुम ने ख़ुदा जाने क्या किया होगा
ज़रा सी बात के अफ़्साने थोड़ी होते हैं

अनवर शऊर




सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूँ मैं
ख़ुद बना लेती है होंटों पर हँसी अपनी जगह

अनवर शऊर




तेरी आस पे जीता था मैं वो भी ख़त्म हुई
अब दुनिया में कौन है मेरा कोई नहीं मेरा

अनवर शऊर




था व'अदा शाम का मगर आए वो रात को
मैं भी किवाड़ खोलने फ़ौरन नहीं गया

अनवर शऊर