ये हासिल है मिरी ख़ामोशियों का
कि पत्थर आज़माने लग गए हैं
मदन मोहन दानिश
ये नादानी नहीं तो क्या है 'दानिश'
समझना था जिसे समझा रहा हूँ
मदन मोहन दानिश
यहाँ कोई न जी सका न जी सकेगा होश में
मिटा दे नाम होश का शराब ला शराब ला
मदन पाल
ब-जुज़ हक़ के नहीं है ग़ैर से हरगिज़ तवक़्क़ो कुछ
मगर दुनिया के लोगों में मुझे है प्यार से मतलब
मह लक़ा चंदा
'चंदा' रहे परतव से तिरे या अली रौशन
ख़ुर्शीद को है दर से तिरे शाम-ओ-सहर फ़ैज़
मह लक़ा चंदा
दरेग़ चश्म-ए-करम से न रख कि ऐ ज़ालिम
करे है दिल को मिरे तेरी यक नज़र महज़ूज़
मह लक़ा चंदा
दिल हो गया है ग़म से तिरे दाग़दार ख़ूब
फूला है क्या ही जोश से ये लाला-ज़ार ख़ूब
मह लक़ा चंदा

