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4 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

4 लाइन शायरी

446 शेर

कोई समझे तो एक बात कहूँ
इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं

if someone were to listen, one thing I will opine
Love is not a crime forsooth it is grace divine

फ़िराक़ गोरखपुरी




मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता

my loneliness my heart and me
would be nice

फ़िराक़ गोरखपुरी




मौत का भी इलाज हो शायद
ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं

for death a cure there well may be
but for this life no remedy

फ़िराक़ गोरखपुरी




न कोई वा'दा न कोई यक़ीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था

no promise,surety, nor any hope was due
yet I had little choice but to wait for you

फ़िराक़ गोरखपुरी




पाल ले इक रोग नादाँ ज़िंदगी के वास्ते
पाल ले इक रोग सिर्फ़ सेहत के सहारे

o foolish one for sake of living do adopt love's malady
heath alone is not enough,

फ़िराक़ गोरखपुरी




तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखें कि तुम से बात करें

close to me you are there
should I speak or should I stare/see

फ़िराक़ गोरखपुरी




तू याद आया तिरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए
मोहब्बत में ये मा'सूमी बड़ी मुश्किल से आती है

You I did remember, your torments all forgot
such innocence in love, is with hardship wrought

फ़िराक़ गोरखपुरी