बैठता है हमेशा रिंदों में
कहीं ज़ाहिद वली न हो जाए
बेखुद बदायुनी
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दैर-ओ-हरम को देख लिया ख़ाक भी नहीं
बस ऐ तलाश-ए-यार न दर-दर फिरा मुझे
बेखुद बदायुनी
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गर्दिश-ए-बख़्त से बढ़ती ही चली जाती हैं
मिरी दिल-बस्तगियाँ ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर के साथ
बेखुद बदायुनी
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हासिल उस मह-लक़ा की दीद नहीं
ईद है और हम को ईद नहीं
बेखुद बदायुनी
कभी हया उन्हें आई कभी ग़ुरूर आया
हमारे काम में सौ सौ तरह फ़ुतूर आया
बेखुद बदायुनी
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ख़ून हो जाएँ ख़ाक में मिल जाएँ
हज़रत-ए-दिल से कुछ बईद नहीं
बेखुद बदायुनी
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न मुदारात हमारी न अदू से नफ़रत
न वफ़ा ही तुम्हें आई न जफ़ा ही आई
बेखुद बदायुनी

