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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

शिफ़ा क्या हो नहीं सकती हमें लेकिन नहीं होती
दवा क्या कर नहीं सकते हैं हम लेकिन नहीं करते

बेखुद बदायुनी




शिकवा सुन कर जो मिज़ाज-ए-बुत-ए-बद-ख़ू बदला
हम ने भी साथ ही तक़रीर का पहलू बदला

बेखुद बदायुनी




उन की हसरत भी नहीं मैं भी नहीं दिल भी नहीं
अब तो 'बेख़ुद' है ये आलम मिरी तंहाई का

बेखुद बदायुनी




वाइज़ ओ मोहतसिब का जमघट है
मै-कदा अब तो मै-कदा न रहा

बेखुद बदायुनी




वो जो कर रहे हैं बजा कर रहे हैं
ये जो हो रहा है बजा हो रहा है

बेखुद बदायुनी




वो उन का वस्ल में ये कह के मुस्कुरा देना
तुलू-ए-सुब्ह से पहले हमें जगा देना

बेखुद बदायुनी




आइना देख कर वो ये समझे
मिल गया हुस्न-ए-बे-मिसाल हमें

बेख़ुद देहलवी