दिल लगा लेते हैं अहल-ए-दिल वतन कोई भी हो
फूल को खिलने से मतलब है चमन कोई भी हो
बासिर सुल्तान काज़मी
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गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भी
वो बात अपनी जगह है ये बात अपनी जगह
बासिर सुल्तान काज़मी
जब भी मिले हम उन से उन्हों ने यही कहा
बस आज आने वाले थे हम आप की तरफ़
बासिर सुल्तान काज़मी
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कैसे याद रही तुझ को
मेरी इक छोटी सी भूल
बासिर सुल्तान काज़मी
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ख़त्म हुईं सारी बातें
अच्छा अब चलता हूँ मैं
बासिर सुल्तान काज़मी
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कुछ तो हस्सास हम ज़ियादा हैं
कुछ वो बरहम ज़ियादा होता है
बासिर सुल्तान काज़मी
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रुक गया हाथ तिरा क्यूँ 'बासिर'
कोई काँटा तो न था फूलों में
बासिर सुल्तान काज़मी

