EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

नैरंगियाँ फ़लक की जभी हैं कि हों बहम
काली घटा सफ़ेद प्याले शराब-ए-सुर्ख़

बयान मेरठी




पार दरिया-ए-शहादत से उतर जाते हैं सर
कश्ती-ए-उश्शाक़ की मल्लाह बन जाती है तेग़

बयान मेरठी




शैख़ के माथे पे मिट्टी बरहमन के बर में बुत
आदमी दैर-ओ-हरम से ख़ाक पत्थर ले चला

बयान मेरठी




वही उठाए मुझे जो बने मिरा मज़दूर
तुम्हारे कूचे में बैठा हूँ मैं मकाँ की तरह

बयान मेरठी




वो हटे आँख के आगे से तो बस सूरत-ए-अक्स
मैं भी इस आईना-ख़ाना से निकल जाऊँगा

बयान मेरठी




वो पोशीदा रखते हैं अपना तअ'ल्लुक़
इधर देख कर फिर उधर देख लेना

बयान मेरठी




याद में ख़्वाब में तसव्वुर में
आ कि आने के हैं हज़ार तरीक़

बयान मेरठी