शाम उतरी है फिर अहाते में
जिस्म पर रौशनी के घाव लिए
बकुल देव
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तअ'ल्लुक़ तर्क तो कर लें सभी से
भले लगते हैं कुछ नुक़सान लेकिन
बकुल देव
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
उतर जाता तो रुस्वाई बहुत होती
कि सर का बोझ भी दस्तार जैसा था
बकुल देव
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
वही आँसू वही माज़ी के क़िस्से
जिसे देखो कटे को काटता है
बकुल देव
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ज़ेर-ए-लब रख छुपा के नाम उस का
लफ़्ज़ होते हैं कुछ बयाँ से ख़राब
बकुल देव
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ऐसी होने लगी थकन उस को
दिन के ढलते ही सो गया रस्ता
बलवान सिंह आज़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
चलूँगा कब तलक तन्हा सफ़र में
मुझे मिलता नहीं है कारवाँ क्यूँ
बलवान सिंह आज़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

