तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा
बराबर है दुनिया को देखा न देखा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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टुक ख़बर ले कि हर घड़ी हम को
अब जुदाई बहुत सताती है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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उन लबों ने न की मसीहाई
हम ने सौ सौ तरह से मर देखा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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वाए नादानी कि वक़्त-ए-मर्ग ये साबित हुआ
ख़्वाब था जो कुछ कि देखा जो सुना अफ़्साना था
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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वहदत में तेरी हर्फ़ दुई का न आ सके
आईना क्या मजाल तुझे मुँह दिखा सके
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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या-रब ये क्या तिलिस्म है इदराक-ओ-फ़हम याँ
दौड़े हज़ार आप से बाहर न जा सके
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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यक-ब-यक नाम ले उठा मेरा
जी में क्या उस के आ गया होगा
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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