साक़िया! याँ लग रहा है चल-चलाव
जब तलक बस चल सके साग़र चले
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
सैर-ए-बहार-ए-बाग़ से हम को मुआ'फ़ कीजिए
उस के ख़याल-ए-ज़ुल्फ़ से 'दर्द' किसे फ़राग़ है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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सल्तनत पर नहीं है कुछ मौक़ूफ़
जिस के हाथ आए जाम वो जम है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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शम्अ के मानिंद हम इस बज़्म में
चश्म-ए-तर आए थे दामन-तर चले
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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तमन्ना तिरी है अगर है तमन्ना
तिरी आरज़ू है अगर आरज़ू है
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले
जिस लिए आए थे हम कर चले
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
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