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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

साक़िया! याँ लग रहा है चल-चलाव
जब तलक बस चल सके साग़र चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




सैर-ए-बहार-ए-बाग़ से हम को मुआ'फ़ कीजिए
उस के ख़याल-ए-ज़ुल्फ़ से 'दर्द' किसे फ़राग़ है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




सल्तनत पर नहीं है कुछ मौक़ूफ़
जिस के हाथ आए जाम वो जम है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




शम्अ के मानिंद हम इस बज़्म में
चश्म-ए-तर आए थे दामन-तर चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




तमन्ना तिरी है अगर है तमन्ना
तिरी आरज़ू है अगर आरज़ू है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'




तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले
जिस लिए आए थे हम कर चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'