EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

दिल में उमंग और इरादा कोई तो हो
बे-कैफ़ ज़िंदगी में तमाशा कोई तो हो

ख़लील मामून




फ़तह के जश्न में हैं सब सरशार
मैं तो अपनी ही मात में गुम हूँ

ख़लील मामून




हर एक जगह भटकते फिरेंगे सारी उम्र
बिल-आख़िर अपने ही घर जाएँगे किसी दिन हम

ख़लील मामून




हर एक काम है धोका हर एक काम है खेल
कि ज़िंदगी में तमाशा बहुत ज़रूरी है

ख़लील मामून




हज़ारों चाँद सितारे चमक गए होते
कभी नज़र जो तिरी माइल-ए-करम होती

ख़लील मामून




जंगलों में कहीं खो जाना है
जानवर फिर मुझे हो जाना है

ख़लील मामून




जवाब ढूँड के सारे जहाँ से जब लौटे
हमें तो कर गया यक-लख़्त ला-जवाब कोई

ख़लील मामून