तुम नहीं आओगे ख़बर है हमें
फिर भी हम इंतिज़ार कर लेंगे
ख़लील मामून
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वो बुराई सब से मेरी कर रहे हैं
क्यूँ नहीं करते बयाँ अच्छाइयों को
ख़लील मामून
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गर्मी बहुत है आज खुला रख मकान को
उस की गली से रात को पुर्वाई आएगी
ख़लील रामपुरी
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गर्मी बहुत है आज खुला रख मकान को
उस की गली से रात को पुर्वाई आएगी
ख़लील रामपुरी
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अब के सफ़र में दर्द के पहलू अजीब हैं
जो लोग हम-ख़याल न थे हम-सफ़र हुए
खलील तनवीर
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अजीब शख़्स था उस को समझना मुश्किल है
किनार-ए-आब खड़ा था मगर वो प्यासा था
खलील तनवीर
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अपना लहू यतीम था कोई न रंग ला सका
मुंसिफ़ सभी ख़मोश थे उज़्र-ए-जफ़ा के सामने
खलील तनवीर
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