हम को भी सर कोई दरकार है अब सर के एवज़
पत्थर इक हम भी चला देते हैं पत्थर के एवज़
कर्रार नूरी
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कौन हो सकता है आने वाला
एक आवाज़ सी आई थी अभी
कर्रार नूरी
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| स्वागत हे |
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नाकामियों ने और भी सरकश बना दिया
इतने हुए ज़लील कि ख़ुद्दार हो गए
कर्रार नूरी
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आब-ए-हैवाँ को मय से क्या निस्बत
पानी पानी है और शराब शराब
कशफ़ी मुल्तानी
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'कशफ़ी' को कोई पूछने आए तो दोस्तो
कहना कि चंद शेर सुना कर चले गए
कशफ़ी मुल्तानी
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नाचती है जब तू अपने दिलरुबा अंदाज़ से
आफ़रीं के नग़्मे उठते हैं दिलों के साज़ से
कशफ़ी मुल्तानी
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तेरी आँखें हैं कि आहू-ए-ख़ुतन की आँखें
महव-ए-हैरत थीं जवानान-ए-चमन की आँखें
कशफ़ी मुल्तानी
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