मुझ से मंसूब है ग़ुबार मिरा
क़ाफ़िले में न कर शुमार मिरा
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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मुझ से रस्तों का बिछड़ना नहीं देखा जाता
मुझ से मिलने वो किसी मोड़ पे आया न करे
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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न हम वहशत में अपने घर से निकले
न सहरा अपनी वीरानी से निकला
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
नज़र मिली तो नज़ारों में बाँट दी मैं ने
ये रौशनी भी सितारों में बाँट दी मैं ने
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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नींद उड़ने लगी है आँखों से
धूल जमने लगी है बिस्तर पर
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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सहरा में आ निकले तो मालूम हुआ
तन्हाई को वुसअत कम पड़ जाती है
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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शोर जितना है काएनात में शोर
मेरे अंदर की ख़ामुशी से हुआ
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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