वो मेरी फ़हम का लेता है इम्तिहाँ शायद
कि हर सवाल से पहले जवाब माँगे है
करामत अली करामत
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अय्याम मुसीबत के तो काटे नहीं कटते
दिन ऐश के घड़ियों में गुज़र जाते हैं कैसे
करामत अली शहीदी
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जी चाहेगा जिस को उसे चाहा न करेंगे
हम इश्क़ ओ हवस को कभी यकजा न करेंगे
करामत अली शहीदी
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सीख ले हम से कोई ज़ब्त-ए-जुनूँ के अंदाज़
बरसों पाबंद रहे पर न हिलाई ज़ंजीर
करामत अली शहीदी
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आह तो अब भी दिल से उठती है
लेकिन उस में असर नहीं होता
करामत बुख़ारी
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एक नज़र में उस ने हर इक दिल को जीत लिया
एक नज़र में उस के हो गए जाने कितने लोग
करामत बुख़ारी
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गवाही के लिए काफ़ी रहेगा
मैं अपना ख़ून मुँह पे मल रहा हूँ
करामत बुख़ारी
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