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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

सितारों से भरा ये आसमाँ कैसा लगेगा
हमारे बा'द तुम को ये जहाँ कैसा लगेगा

इफ़्तिख़ार आरिफ़




सुब्ह सवेरे रन पड़ना है और घमसान का रन
रातों रात चला जाए जिस को जाना है

इफ़्तिख़ार आरिफ़




तमाम ख़ाना-ब-दोशों में मुश्तरक है ये बात
सब अपने अपने घरों को पलट के देखते हैं

इफ़्तिख़ार आरिफ़




तमाशा करने वालों को ख़बर दी जा चुकी है
कि पर्दा कब गिरेगा कब तमाशा ख़त्म होगा

इफ़्तिख़ार आरिफ़




तुम से बिछड़ कर ज़िंदा हैं
जान बहुत शर्मिंदा हैं

इफ़्तिख़ार आरिफ़




उमीद-ओ-बीम के मेहवर से हट के देखते हैं
ज़रा सी देर को दुनिया से कट के देखते हैं

इफ़्तिख़ार आरिफ़




उसी को बात न पहुँचे जिसे पहुँचनी हो
ये इल्तिज़ाम भी अर्ज़-ए-हुनर में रक्खा जाए

इफ़्तिख़ार आरिफ़