यारब नवा-ए-दिल से ये कान आश्ना से हैं
आवाज़ आ ही है ये कब की सुनी हुई
फ़ानी बदायुनी
या-रब तिरी रहमत से मायूस नहीं 'फ़ानी'
लेकिन तिरी रहमत की ताख़ीर को क्या कहिए
फ़ानी बदायुनी
यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए
बज़्म में गोया मिरी जानिब इशारा कर दिया
फ़ानी बदायुनी
यूँ न किसी तरह कटी जब मिरी ज़िंदगी की रात
छेड़ के दास्तान-ए-ग़म दिल ने मुझे सुला दिया
फ़ानी बदायुनी
यूँ न क़ातिल को जब यक़ीं आया
हम ने दिल खोल कर दिखाई चोट
फ़ानी बदायुनी
ज़माना बर-सर-ए-आज़ार था मगर 'फ़ानी'
तड़प के हम ने भी तड़पा दिया ज़माने को
फ़ानी बदायुनी
ज़िक्र जब छिड़ गया क़यामत का
बात पहुँची तिरी जवानी तक
फ़ानी बदायुनी

