तिनकों से खेलते ही रहे आशियाँ में हम
आया भी और गया भी ज़माना बहार का
फ़ानी बदायुनी
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तुम्हीं कहो कि तुम्हें अपना समझ के क्या पाया
मगर यही कि जो अपने थे सब पराए हुए
फ़ानी बदायुनी
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उस को भूले तो हुए हो 'फ़ानी'
क्या करोगे वो अगर याद आया
फ़ानी बदायुनी
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वो नज़र कामयाब हो के रही
दिल की बस्ती ख़राब हो के रही
फ़ानी बदायुनी
वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में
वो दिल में आ के अदा तेरे मुस्कुराने की
फ़ानी बदायुनी
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या कहते थे कुछ कहते जब उस ने कहा कहिए
तो चुप हैं कि क्या कहिए खुलती है ज़बाँ कोई
फ़ानी बदायुनी
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या तिरे मुहताज हैं ऐ ख़ून-ए-दिल
या इन्हीं आँखों से दरिया भर गए
फ़ानी बदायुनी
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