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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

न जाने कब तिरे दिल पर नई सी दस्तक हो
मकान ख़ाली हुआ है तो कोई आएगा

बशीर बद्र




न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

बशीर बद्र




न उदास हो न मलाल कर किसी बात का न ख़याल कर
कई साल ब'अद मिले हैं हम तेरे नाम आज की शाम है

बशीर बद्र




नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे

बशीर बद्र




नाम पानी पे लिखने से क्या फ़ाएदा
लिखते लिखते तिरे हाथ थक जाएँगे

बशीर बद्र




नहीं है मेरे मुक़द्दर में रौशनी न सही
ये खिड़की खोलो ज़रा सुब्ह की हवा ही लगे

बशीर बद्र




पहचान अपनी हम ने मिटाई है इस तरह
बच्चों में कोई बात हमारी न आएगी

बशीर बद्र