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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है

बशीर बद्र




सुनाते हैं मुझे ख़्वाबों की दास्ताँ अक्सर
कहानियों के पुर-असरार लब तुम्हारी तरह

बशीर बद्र




तहज़ीब के लिबास उतर जाएँगे जनाब
डॉलर में यूँ नचाएगी इक्कीसवीं सदी

बशीर बद्र




तिरी आरज़ू तिरी जुस्तुजू में भटक रहा था गली गली
मिरी दास्ताँ तिरी ज़ुल्फ़ है जो बिखर बिखर के सँवर गई

बशीर बद्र




तुम अभी शहर में क्या नए आए हो
रुक गए राह में हादसा देख कर

बशीर बद्र




तुम मोहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली

बशीर बद्र




तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो मर जाऊँगा
यूँ करो जाने से पहले मुझे पागल कर दो

बशीर बद्र