मैं यूँ भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ
कोई मासूम क्यूँ मेरे लिए बदनाम हो जाए
बशीर बद्र
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मेरा शैतान मर गया शायद
मेरे सीने पे सो रहा है कोई
बशीर बद्र
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मेरी आँख के तारे अब न देख पाओगे
रात के मुसाफ़िर थे खो गए उजालों में
बशीर बद्र
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मिरे साथ चलने वाले तुझे क्या मिला सफ़र में
वही दुख-भरी ज़मीं है वही ग़म का आसमाँ है
बशीर बद्र
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मोहब्बत अदावत वफ़ा बे-रुख़ी
किराए के घर थे बदलते रहे
बशीर बद्र
मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता
बशीर बद्र
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला
बशीर बद्र

