कहने वाले कहता जा तू
सुनने वाला सुनता तो है
अज़ीम कुरेशी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
सहरा का कोई फूल मोअ'त्तर तो नहीं था
था एक छलावा कोई मंज़र तो नहीं था
अज़ीम कुरेशी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तिरे विसाल की कब आरज़ू रही दिल को
कि हम ने चाहा तुझे शौक़-ए-बे-सबब के लिए
अज़ीम कुरेशी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
आँसुओं की तरह वजूद मिरा
बहता जाता है आबशार के साथ
अज़हर अब्बास
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अकेला मैं ही नहीं जा रहा हूँ बस्ती से
ये रौशनी भी मिरे साथ जाने वाली है
अज़हर अब्बास
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अपने वीराने का नुक़सान नहीं चाहता मैं
या'नी अब दूसरा इंसान नहीं चाहता मैं
अज़हर अब्बास
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हँसी मज़ाक़ की बातें यहीं पे ख़त्म हुईं
अब इस के बअ'द कहानी रुलाने वाली है
अज़हर अब्बास
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

