इक सितम ढाने में फ़र्द एक सितम सहने में
अल-ग़रज़ है न तुम्हारा न मिरा दिल नाक़िस
नूह नारवी
इस कम-सिनी में हो उन्हें मेरा ख़याल क्या
वो कै बरस के हैं अभी सिन क्या है साल क्या
नूह नारवी
इश्क़ में कुछ नज़र नहीं आया
जिस तरफ़ देखिए अँधेरा है
नूह नारवी
जाने को जाए फ़स्ल-ए-गुल आने को आए हर बरस
हम ग़म-ज़दों के वास्ते जैसे चमन वैसे क़फ़स
नूह नारवी
जब ज़िक्र किया मैं ने कभी वस्ल का उन से
वो कहने लगे पाक मोहब्बत है बड़ी चीज़
नूह नारवी
जिगर की चोट ऊपर से कहीं मा'लूम होती है
जिगर की चोट ऊपर से नहीं मा'लूम होती है
नूह नारवी
जो अहल-ए-ज़ौक़ हैं वो लुत्फ़ उठा लेते हैं चल फिर कर
गुलिस्ताँ का गुलिस्ताँ में बयाबाँ का बयाबाँ में
नूह नारवी

