दिल को तुम शौक़ से ले जाओ मगर याद रहे
ये न मेरा न तुम्हारा न किसी का होगा
नूह नारवी
दिल में घुट घुट कर इन्हें रहते ज़माना हो गया
मेरी फ़रियादें भी अब आमादा-ए-फ़रियाद हैं
नूह नारवी
दिल नज़्र करो ज़ुल्म सहो नाज़ उठाओ
ऐ अहल-ए-तमन्ना ये हैं अरकान-ए-तमन्ना
नूह नारवी
दिल उन्हें देंगे मगर हम देंगे इन शर्तों के साथ
आज़मा कर जाँच कर सुन कर समझ कर देख कर
नूह नारवी
दोस्ती को बुरा समझते हैं
क्या समझ है वो क्या समझते हैं
नूह नारवी
दूँगा जवाब मैं भी बड़ी शद्द-ओ-मद के साथ
लिक्खा है उस ने मुझ को बड़े कर्र-ओ-फ़र्र से ख़त
नूह नारवी
फ़ित्ने दबे-दबाए थे जितने पड़े हुए
बैठे कहीं हो तुम तो वो सब उठ खड़े हुए
नूह नारवी

