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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ग़ैर का इश्क़ है कि मेरा है
साफ़ कह दो अभी सवेरा है

नूह नारवी




हम इंतिज़ार करें हम को इतनी ताब नहीं
पिला दो तुम हमें पानी अगर शराब नहीं

नूह नारवी




हम ने ये देख लिया देख लिया देख लिया
आप भी 'नूह' के तूफ़ान से डर जाते हैं

नूह नारवी




हमारे दिल से क्या अरमान सब इक साथ निकलेंगे
कि क़ैदी मुख़्तलिफ़ मीआ'द के होते हैं ज़िंदाँ में

नूह नारवी




हमें इसरार मिलने पर तुम्हें इंकार मिलने से
न तुम मानो न हम मानें न ये कम हो न वो कम हो

नूह नारवी




हज़ारों रंज-ए-दिल दे दे के माशूक़ों को झेले हैं
ये पापड़ किस ने बेले हैं ये पापड़ मैं ने बेले में

नूह नारवी




हुस्न-ए-मुत्लक़ का निशाँ का'बे में तो मिलता नहीं
एहतियात आओ चल कर देख लें बुत-ख़ाना हम

नूह नारवी