दिल का आईना हुआ जाता है धुँदला धुँदला
कब तिरा अक्स इसे अपनी सफ़ाई देगा
मोहम्मद अल्वी
दिन भर बच्चों ने मिल कर पत्थर फेंके फल तोड़े
साँझ हुई तो पंछी मिल कर रोने लगे दरख़्तों पर
मोहम्मद अल्वी
दिन ढल रहा था जब उसे दफ़ना के आए थे
सूरज भी था मलूल ज़मीं पर झुका हुआ
मोहम्मद अल्वी
दोनों के दिल में ख़ौफ़ था मैदान-ए-जंग में
दोनों का ख़ौफ़ फ़ासला था दरमियान का
मोहम्मद अल्वी
'फ़ैज़'-साहिब शेर क्यूँ कहते नहीं
'फ़ैज़'-साहिब शेर कहना चाहिए
मोहम्मद अल्वी
गली में कोई घर अच्छा नहीं था
मगर कुछ खिड़कियाँ अच्छी लगी हैं
मोहम्मद अल्वी
ग़म बहुत दिन मुफ़्त की खाता रहा
अब उसे दिल से निकाला चाहिए
मोहम्मद अल्वी

