इश्क़ से जा नहीं कोई ख़ाली
दिल से ले अर्श तक भरा है इश्क़
मीर तक़ी मीर
जाए है जी नजात के ग़म में
ऐसी जन्नत गई जहन्नम में
मीर तक़ी मीर
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जम गया ख़ूँ कफ़-ए-क़ातिल पे तिरा 'मीर' ज़ि-बस
उन ने रो रो दिया कल हाथ को धोते धोते
मीर तक़ी मीर
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जौर क्या क्या जफ़ाएँ क्या क्या हैं
आशिक़ी में बलाएँ क्या क्या हैं
मीर तक़ी मीर
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जिन जिन को था ये इश्क़ का आज़ार मर गए
अक्सर हमारे साथ के बीमार मर गए
मीर तक़ी मीर
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जो तुझ बिन न जीने को कहते थे हम
सो इस अहद को अब वफ़ा कर चले
मीर तक़ी मीर
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काबे में जाँ-ब-लब थे हम दूरी-ए-बुताँ से
आए हैं फिर के यारो अब के ख़ुदा के हाँ से
मीर तक़ी मीर
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