हम आप ही को अपना मक़्सूद जानते हैं
अपने सिवाए किस को मौजूद जानते हैं
मीर तक़ी मीर
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हम फ़क़ीरों से बे-अदाई क्या
आन बैठे जो तुम ने प्यार किया
मीर तक़ी मीर
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हम ने जाना था लिखेगा तू कोई हर्फ़ ऐ 'मीर'
पर तिरा नामा तो इक शौक़ का दफ़्तर निकला
मीर तक़ी मीर
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हम तौर-ए-इश्क़ से तो वाक़िफ़ नहीं हैं लेकिन
सीने में जैसे कोई दिल को मला करे है
मीर तक़ी मीर
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हमारे आगे तिरा जब किसू ने नाम लिया
दिल-ए-सितम-ज़दा को हम ने थाम थाम लिया
मीर तक़ी मीर
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हर क़दम पर थी उस की मंज़िल लेक
सर से सौदा-ए-जुस्तजू न गया
मीर तक़ी मीर
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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ये नुमाइश सराब की सी है
मीर तक़ी मीर
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