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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ज़िंदगी के आख़िरी लम्हे ख़ुशी से भर गया
एक दिन इतना हँसा वो हँसते हँसते मर गया

कृष्ण मोहन




अपने गिर्द-ओ-पेश का भी कुछ पता रख
दिल की दुनिया तो मगर सब से जुदा रख

कुमार पाशी




दश्त-ए-जुनूँ की ख़ाक उड़ाने वालों की हिम्मत देखो
टूट चुके हैं अंदर से लेकिन मन-मानी बाक़ी है

कुमार पाशी




हैं सारे इंकिशाफ़ अपने हैं सारे मुम्किनात अपने
हम इस दुनिया का सारा इल्म ले जाएँगे साथ अपने

कुमार पाशी




हुई हैं दैर ओ हरम में ये साज़िशें कैसी
धुआँ सा उठने लगा शहर के मकानों से

कुमार पाशी




कभी दिखा दे वो मंज़र जो मैं ने देखे नहीं
कभी तो नींद में ऐ ख़्वाब के फ़रिश्ते आ

कुमार पाशी




कोई तो ढूँड के मुझ को कहीं से ले आए
कि ख़ुद को देखा नहीं है बहुत ज़मानों से

कुमार पाशी