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नज़र मिली तो नज़ारों में बाँट दी मैं ने | शाही शायरी
nazar mili to nazaron mein banT di maine

ग़ज़ल

नज़र मिली तो नज़ारों में बाँट दी मैं ने

काशिफ़ हुसैन ग़ाएर

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नज़र मिली तो नज़ारों में बाँट दी मैं ने
ये रौशनी भी सितारों में बाँट दी मैं ने

बस एक शाम बची थी तुम्हारे हिस्से की
मगर वो शाम भी यारों में बाँट दी मैं ने

जनाब क़र्ज़ चुकाया है यूँ अनासिर का
कि ज़िंदगी इन्ही चारों में बाँट दी मैं ने

पुकारते थे बराबर मुझे सफ़र के लिए
मताअ-ए-ख़्वाब सवारों में बाँट दी मैं ने

हवा मिज़ाज था करता भी क्या समुंदर का
इक एक लहर किनारों में बाँट दी मैं ने