तेरा ख़याल तेरी तमन्ना तक आ गया
मैं दिल को ढूँढता हुआ दुनिया तक आ गया
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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ये हवा यूँ ही ख़ाक छानती है
या कोई चीज़ खो गई है यहाँ
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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ज़मीं आबाद होती जा रही है
कहाँ जाएगी तन्हाई हमारी
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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ज़िंदगी धूप में आने से खुली
साया दीवार उठाने से खुला
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
ज़िंदगी में कसक ज़रूरी थी
ये ख़ला पुर तिरी कमी से हुआ
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
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हवा-ए-कूचा-ए-दुनिया मैं जानता हूँ तुझे
तू जब भी आती है बीमार करने आती है
काशिफ़ मजीद
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आओ हम हँसते उठें बज़्म-ए-दिल-आज़ाराँ से
कौन एहसास को बीमार बना कर उट्ठे
क़ौसर जायसी
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