कुछ रोज़ अभी और है ये आइना-ख़ाना
कुछ रोज़ अभी और मैं हैरत में रहूँगा
इनाम नदीम
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नींद से जागा हूँ तो बैठा सोचता हूँ
ख़्वाब में उस को पाया था या साया था
इनाम नदीम
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पुकारते थे मुझे आसमाँ मगर मैं ने
क़याम करने को ये ख़ाक-दाँ पसंद किया
इनाम नदीम
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वो दिल जिस ने हमें रुस्वा किया था
हम आज उस दिल को रुस्वा कर चुके हैं
इनाम नदीम
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ये मोहब्बत भी एक नेकी है
इस को दरिया में डाल आते हैं
इनाम नदीम
ज़माना है बुरे हम-साए जैसा
सो हम-साए से झगड़ा कर चुके हैं
इनाम नदीम
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प्रोफ़ेसर ही जब आते हों हफ़्ता-वार कॉलेज में
तो ऊँचा क्यूँ न हो तालीम का मेआर कॉलेज में
इनाम-उल-हक़ जावेद
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