EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

हर सदा से बच के वो एहसास-ए-तन्हाई में है
अपने ही दीवार-ओ-दर में गूँजता रह जाएगा

हयात लखनवी




मुद्दआ हम अपना काग़ज़ पर रक़म कर जाएँगे
वक़्त के हाथों में अपना फ़ैस्ला रह जाएगा

हयात लखनवी




सिलसिला ख़्वाबों का सब यूँही धरा रह जाएगा
एक दिन बिस्तर पे कोई जागता रह जाएगा

हयात लखनवी




ये इल्तिजा दुआ ये तमन्ना फ़ुज़ूल है
सूखी नदी के पास समुंदर न जाएगा

हयात लखनवी




ये जज़्बा-ए-तलब तो मिरा मर न जाएगा
तुम भी अगर मिलोगे तो जी भर न जाएगा

हयात लखनवी




दूसरों के वास्ते जीते रहे मरते रहे
ख़ूब-सीरत लोग थे राज़-ए-मोहब्बत पा गए

हयात रिज़वी अमरोहवी




है इख़्तियार हमें काएनात पर हासिल
सवाल ये है कि हम किस के इख़्तियार में हैं

हयात वारसी