सारी इज़्ज़त नौकरी से इस ज़माने में है 'मेहर'
जब हुए बे-कार बस तौक़ीर आधी रह गई
हातिम अली मेहर
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सबा जो बड़ी बाग़ वाली हुई है
तुम्हारी गली की निकाली हुई है
हातिम अली मेहर
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तिरी तलाश से बाक़ी कोई मकाँ न रहा
हरम में दैर में बंदा कहाँ कहाँ न रहा
हातिम अली मेहर
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तू ने वहदत को कर दिया कसरत
कभी तन्हा नज़र नहीं आता
हातिम अली मेहर
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वहदहू-ला-शरीक की है क़सम
ऐ सनम तुम बुतों में यकता हो
हातिम अली मेहर
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याद में इक शोख़ पंजाबी के रोते हैं जो हम
आज-कल पंजाब में बहता है दरिया एक और
हातिम अली मेहर
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याद रखने की ये बातें हैं बजा है सच है
आप भूले न हमें आप को हम भूल गए
हातिम अली मेहर
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