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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

कोई जुगनू कोई तारा कोई सूरज कोई चाँद
और अजब बात कि महरूम-ए-उजाला सब हैं

ग़ुफ़रान अमजद




नवाह-ए-लफ़्ज़-ओ-मआनी में गूँज है किस की
कोई बताए ये 'अमजद' कि हम बताएँगे

ग़ुफ़रान अमजद




आह! कल तक वो नवाज़िश! आज इतनी बे-रुख़ी
कुछ तो निस्बत चाहिए अंजाम को आग़ाज़ से

ग़ुलाम भीक नैरंग




दाना-ओ-दाम सँभाला मिरे सय्याद ने फिर
अपनी गर्दन है वही इश्क़ का फंदा है वही

ग़ुलाम भीक नैरंग




दर्द उल्फ़त का न हो तो ज़िंदगी का क्या मज़ा
आह-ओ-ज़ारी ज़िंदगी है बे-क़रारी ज़िंदगी

ग़ुलाम भीक नैरंग




कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती
हम को अगर मयस्सर जानाँ की दीद होती

ग़ुलाम भीक नैरंग




महव-ए-दीद-ए-चमन-ए-शौक़ है फिर दीदा-ए-शौक़
गुल-ए-शादाब वही बुलबुल-ए-शैदा है वही

ग़ुलाम भीक नैरंग