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Tasawwur शायरी | शाही शायरी

Tasawwur

33 शेर

यूँ बरसती हैं तसव्वुर में पुरानी यादें
जैसे बरसात की रिम-झिम में समाँ होता है

क़तील शिफ़ाई




उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के शिकवे अब कहाँ
अब तो ये बातें भी ऐ दिल हो गईं आई गई

साहिर लुधियानवी




घर की तामीर तसव्वुर ही में हो सकती है
अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है

शहरयार




यूँ तिरी याद में दिन रात मगन रहता हूँ
दिल धड़कना तिरे क़दमों की सदा लगता है

शहज़ाद अहमद




देखूँ हूँ तुझ को दूर से बैठा हज़ार कोस
ऐनक न चाहिए न यहाँ दूरबीं मुझे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम