हम कि शोला भी हैं और शबनम भी
तू ने किस रंग में देखा हम को
बाक़ी सिद्दीक़ी
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हर नए हादसे पे हैरानी
पहले होती थी अब नहीं होती
बाक़ी सिद्दीक़ी
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हर याद हर ख़याल है लफ़्ज़ों का सिलसिला
ये महफ़िल-ए-नवा है यहाँ बोलते रहो
बाक़ी सिद्दीक़ी
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हो गए चुप हमें पागल कह कर
जब किसी ने भी न समझा हम को
बाक़ी सिद्दीक़ी
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इस बदलते हुए ज़माने में
तेरे क़िस्से भी कुछ पुराने लगे
बाक़ी सिद्दीक़ी
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कान पड़ती नहीं आवाज़ कोई
दिल में वो शोर बपा है अपना
बाक़ी सिद्दीक़ी
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कश्तियाँ टूट गई हैं सारी
अब लिए फिरता है दरिया हम को
बाक़ी सिद्दीक़ी
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