तुझ को देखा तिरे वादे देखे
ऊँची दीवार के लम्बे साए
बाक़ी सिद्दीक़ी
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तुम भी उल्टी उल्टी बातें पूछते हो
हम भी कैसी कैसी क़समें खाते हैं
बाक़ी सिद्दीक़ी
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तुम ज़माने की राह से आए
वर्ना सीधा था रास्ता दिल का
बाक़ी सिद्दीक़ी
उन का या अपना तमाशा देखो
जो दिखाता है ज़माना देखो
बाक़ी सिद्दीक़ी
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वक़्त का पत्थर भारी होता जाता है
हम मिट्टी की सूरत देते जाते हैं
बाक़ी सिद्दीक़ी
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वक़्त के पास हैं कुछ तस्वीरें
कोई डूबा है कि उभरा देखो
बाक़ी सिद्दीक़ी
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यही रस्ता है अब यही मंज़िल
अब यहीं दिल किसी बहाने लगे
बाक़ी सिद्दीक़ी
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