ख़्वाहिश-ए-सूद थी सौदे में मोहब्बत के वले
सर-ब-सर इस में ज़ियाँ था मुझे मालूम न था
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'
क्या तुझ को लिखूँ ख़त हरकत हाथ से गुम है
ख़ामा भी मिरे हाथ में अंगुश्त-ए-शशुम है
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'
मत तंग हो करे जो फ़लक तुझ को तंग-दस्त
आहिस्ता खींचिए जो दबे ज़ेर-ए-संग दस्त
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'
क़लम सिफ़त में पस-अज़-मरातिब बदन सना में तिरी खपाया
बदन ज़बाँ में ज़बाँ सुख़न में सुख़न सना में तिरी खपाया
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'
रुश्द-ए-बातिन की तलब है तो कर ऐ शैख़ वो काम
पीर-ए-मय-ख़ाना जो ज़ाहिर में कुछ इरशाद करे
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'
सैलाब से आँखों के रहते हैं ख़राबे में
टुकड़े जो मिरे दिल के बस्ते हैं दो-आबे में
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'
उल्फ़त में तिरी ऐ बुत-ए-बे-मेहर-ओ-मोहब्बत
आया हमें इक हाथ से ताली का बजाना
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

