ये रिंद दे गए लुक़्मा तुझे तो उज़्र न मान
तिरा तो शैख़ तनूर ओ शिकम बराबर है
बक़ा उल्लाह 'बक़ा'
टैग:
| पपड़ी |
| 2 लाइन शायरी |
दोस्त नाराज़ हो गए कितने
इक ज़रा आइना दिखाने में
बाक़ी अहमदपुरी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
सारी बस्ती में फ़क़त मेरा ही घर है बे-चराग़
तीरगी से आप को मेरा पता मिल जाएगा
बाक़ी अहमदपुरी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
सब दोस्त मस्लहत के दुकानों में बिक गए
दुश्मन तो पुर-ख़ुलूस अदावत में अब भी है
बाक़ी अहमदपुरी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
'बाक़ी' जो चुप रहोगे तो उट्ठेंगी उँगलियाँ
है बोलना भी रस्म-ए-जहाँ बोलते रहो
बाक़ी सिद्दीक़ी
टैग:
| खामोशी |
| 2 लाइन शायरी |
बंद कलियों की अदा कहती है
बात करने के हैं सौ पैराए
बाक़ी सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
दिल की दीवार गिर गई शायद
अपनी आवाज़ कान में आई
बाक़ी सिद्दीक़ी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

