EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

दिल कलेजे दिमाग़ सीना ओ चश्म
इन के रहने के हैं मकान बहुत

सख़ी लख़नवी




एक दो तीन चार पाँच छे सात
यूँही गिन लेंगे कम के क्या मअनी

सख़ी लख़नवी




हैफ़ साबित है जेब ने दामन
और जुनून में बहार आई है

सख़ी लख़नवी




हैफ़ साबित है जेब ने दामन
और जुनून में बहार आई है

सख़ी लख़नवी




हम उन से आज का शिकवा करेंगे
उखाड़ेंगे वो बरसों की गड़ी बात

सख़ी लख़नवी




हमा-तन हो गए हैं आईना
ख़ुद-नुमाई सी ख़ुद-नुमाई है

सख़ी लख़नवी




हिचकियाँ आती हैं पर लेते नहीं वो मेरा नाम
देखना उन की फ़रामोशी को मेरी याद को

सख़ी लख़नवी