अजब इक बे-यक़ीनी की फ़ज़ा है
यहाँ होना न होना एक सा है
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अपनी यादें उस से वापस माँग कर
मैं ने अपने-आप को यकजा किया
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
अपनी यादें उस से वापस माँग कर
मैं ने अपने-आप को यकजा किया
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
बदन ने छोड़ दिया रूह ने रिहा न किया
मैं क़ैद ही में रहा क़ैद से निकल के भी
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
बना हुआ है मिरा शहर क़त्ल-गाह कोई
पलट के माओं के लख़्त-ए-जिगर नहीं आते
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
बेवफ़ा लोगों में रहना तिरी क़िस्मत ही सही
इन में शामिल मैं तिरा नाम न होने दूँगा
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
बेवफ़ा लोगों में रहना तिरी क़िस्मत ही सही
इन में शामिल मैं तिरा नाम न होने दूँगा
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |

