यूँ तो मिलने को लोग मिलते हैं
दिल मगर कम किसी से मिलता है
साबिर बद्र जाफ़री
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यूँ तो मिलने को लोग मिलते हैं
दिल मगर कम किसी से मिलता है
साबिर बद्र जाफ़री
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जी भर के तुम्हें देख लूँ तस्कीन हो कुछ तो
मत शम्अ बुझाओ कि अभी रात बहुत है
साबिर दत्त
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ख़्वाबों से न जाओ कि अभी रात बहुत है
पहलू में तुम आओ कि अभी रात बहुत है
साबिर दत्त
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ख़्वाबों से न जाओ कि अभी रात बहुत है
पहलू में तुम आओ कि अभी रात बहुत है
साबिर दत्त
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लोग करते हैं ख़्वाब की बातें
हम ने देखा है ख़्वाब आँखों से
साबिर दत्त
मुद्दतों बाद उठाए थे पुराने काग़ज़
साथ तेरे मिरी तस्वीर निकल आई है
साबिर दत्त

