किसी ख़याल की सरशारी में जारी-ओ-सारी यारी में
अपने-आप कोई आएगा और बन जाएगा मेहमान
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
किसी ज़िंदाँ में सोचना है अबस
दहर हम में है या कि दहर में हम
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कितनी बे-सूद जुदाई है कि दुख भी न मिला
कोई धोका ही वो देता कि मैं पछता सकता
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
कितनी बे-सूद जुदाई है कि दुख भी न मिला
कोई धोका ही वो देता कि मैं पछता सकता
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
कुछ बे-ठिकाना करती रहीं हिजरतें मुदाम
कुछ मेरी वहशतों ने मुझे दर-ब-दर किया
साबिर ज़फ़र
मैं ऐसे जमघटे में खो गया हूँ
जहाँ मेरे सिवा कोई नहीं है
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
मैं ऐसे जमघटे में खो गया हूँ
जहाँ मेरे सिवा कोई नहीं है
साबिर ज़फ़र
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |

