तअल्लुक़ तुम से जो भी है नहीं मालूम कल क्या हो
चलो ये फ़ैसला अपना ख़ुदा पर छोड़ देते हैं
साबिर रज़ा
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ख़्वाब तुम्हारे आते हैं
नींद उड़ा ले जाते हैं
साबिर वसीम
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पहला पत्थर याद हमेशा रहता है
दुख से दिल आबाद हमेशा रहता है
साबिर वसीम
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पहला पत्थर याद हमेशा रहता है
दुख से दिल आबाद हमेशा रहता है
साबिर वसीम
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ये उम्र भर का सफ़र है इसी सहारे पर
कि वो खड़ा है अभी दूसरे किनारे पर
साबिर वसीम
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ऐ काश ख़ुद सुकूत भी मुझ से हो हम-कलाम
मैं ख़ामुशी-ज़दा हूँ सदा चाहिए मुझे
साबिर ज़फ़र
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ऐ काश ख़ुद सुकूत भी मुझ से हो हम-कलाम
मैं ख़ामुशी-ज़दा हूँ सदा चाहिए मुझे
साबिर ज़फ़र
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