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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

तअल्लुक़ तुम से जो भी है नहीं मालूम कल क्या हो
चलो ये फ़ैसला अपना ख़ुदा पर छोड़ देते हैं

साबिर रज़ा




ख़्वाब तुम्हारे आते हैं
नींद उड़ा ले जाते हैं

साबिर वसीम




पहला पत्थर याद हमेशा रहता है
दुख से दिल आबाद हमेशा रहता है

साबिर वसीम




पहला पत्थर याद हमेशा रहता है
दुख से दिल आबाद हमेशा रहता है

साबिर वसीम




ये उम्र भर का सफ़र है इसी सहारे पर
कि वो खड़ा है अभी दूसरे किनारे पर

साबिर वसीम




ऐ काश ख़ुद सुकूत भी मुझ से हो हम-कलाम
मैं ख़ामुशी-ज़दा हूँ सदा चाहिए मुझे

साबिर ज़फ़र




ऐ काश ख़ुद सुकूत भी मुझ से हो हम-कलाम
मैं ख़ामुशी-ज़दा हूँ सदा चाहिए मुझे

साबिर ज़फ़र