सहरा-ए-बे-ख़याल में जल-थल कहाँ के हैं
आख़िर हवा-ए-शौक़ ये बादल कहाँ के हैं
रसा चुग़ताई
शहर में जैसे कोई आसेब है
शहर में मुद्दत से हंगामा नहीं
रसा चुग़ताई
शेर-ओ-सुख़न का शहर नहीं ये शहर-ए-इज़्ज़त-ए-दारां है
तुम तो 'रसा' बद-नाम हुए क्यूँ औरों को बद-नाम करूँ
रसा चुग़ताई
शेर-ओ-सुख़न का शहर नहीं ये शहर-ए-इज़्ज़त-ए-दारां है
तुम तो 'रसा' बद-नाम हुए क्यूँ औरों को बद-नाम करूँ
रसा चुग़ताई
सिर्फ़ माने थी हया बंद-ए-क़बा खुलने तलक
फिर तो वो जान-ए-हया ऐसा खुला ऐसा खुला
रसा चुग़ताई
तेरे आने का इंतिज़ार रहा
उम्र भर मौसम-ए-बहार रहा
रसा चुग़ताई
तिरे नज़दीक आ कर सोचता हूँ
मैं ज़िंदा था कि अब ज़िंदा हुआ हूँ
रसा चुग़ताई

