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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

इस घर की सारी दीवारें शीशे की हैं
लेकिन इस घर का मालिक ख़ुद इक पत्थर है

रसा चुग़ताई




इश्क़ में भी सियासतें निकलीं
क़ुर्बतों में भी फ़ासला निकला

रसा चुग़ताई




जिन आँखों से मुझे तुम देखते हो
मैं उन आँखों से दुनिया देखता हूँ

रसा चुग़ताई




जिन आँखों से मुझे तुम देखते हो
मैं उन आँखों से दुनिया देखता हूँ

रसा चुग़ताई




कौन दिल की ज़बाँ समझता है
दिल मगर ये कहाँ समझता है

रसा चुग़ताई




मिट्टी जब तक नम रहती है
ख़ुश्बू ताज़ा-दम रहती है

रसा चुग़ताई




मिट्टी जब तक नम रहती है
ख़ुश्बू ताज़ा-दम रहती है

रसा चुग़ताई