इस घर की सारी दीवारें शीशे की हैं
लेकिन इस घर का मालिक ख़ुद इक पत्थर है
रसा चुग़ताई
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इश्क़ में भी सियासतें निकलीं
क़ुर्बतों में भी फ़ासला निकला
रसा चुग़ताई
जिन आँखों से मुझे तुम देखते हो
मैं उन आँखों से दुनिया देखता हूँ
रसा चुग़ताई
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जिन आँखों से मुझे तुम देखते हो
मैं उन आँखों से दुनिया देखता हूँ
रसा चुग़ताई
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कौन दिल की ज़बाँ समझता है
दिल मगर ये कहाँ समझता है
रसा चुग़ताई
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मिट्टी जब तक नम रहती है
ख़ुश्बू ताज़ा-दम रहती है
रसा चुग़ताई
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मिट्टी जब तक नम रहती है
ख़ुश्बू ताज़ा-दम रहती है
रसा चुग़ताई
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