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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ख़बर इतनी तो है झोंके तिरे बाद-ए-ख़िज़ाँ पहुँचे
ख़ुदा मालूम तिनके आशियाने के कहाँ पहुँचे

मुबारक अज़ीमाबादी




ख़ैर साक़ी की सलामत मय-कदा
जिस क़दर पी उतनी हुश्यारी बढ़ी

मुबारक अज़ीमाबादी




खटक रही है कोई शय निकाल दे कोई
तड़प रहा है दिल-ए-बे-क़रार सीने में

मुबारक अज़ीमाबादी




किस पे दिल आया कहाँ आया बता ऐ नासेह
तू मिरी तरह परेशान कहाँ जाता है

मुबारक अज़ीमाबादी




किसी की तमन्ना निकलती रही
मिरी आरज़ू हाथ मलती रही

मुबारक अज़ीमाबादी




किसी ने बर्छियाँ मारीं किसी ने तीर मारे हैं
ख़ुदा रक्खे इन्हें ये सब करम-फ़रमा हमारे हैं

मुबारक अज़ीमाबादी




किसी से आज का वादा किसी से कल का वादा है
ज़माने को लगा रक्खा है इस उम्मीद-वारी में

मुबारक अज़ीमाबादी