फिर न दरमाँ का कभी नाम 'मुबारक' लेना
कुफ़्र है दर्द-ए-मोहब्बत का मुदावा करना
मुबारक अज़ीमाबादी
फूल क्या डालोगे तुर्बत पर मिरी
ख़ाक भी तुम से न डाली जाएगी
मुबारक अज़ीमाबादी
क़दम क़दम पे ये कहती हुई बहार आई
कि राह बंद थी जंगल की खोल दी मैं ने
मुबारक अज़ीमाबादी
क़यामत की हक़ीक़त जानता हूँ
ये इक ठोकर है मेरे फ़ित्नागर की
मुबारक अज़ीमाबादी
क़िबला-ओ-काबा ये तो पीने पिलाने के हैं दिन
आप क्या हल्क़ के दरबान बने बैठे हैं
मुबारक अज़ीमाबादी
क़ुबूल हो कि न हो सज्दा ओ सलाम अपना
तुम्हारे बंदे हैं हम बंदगी है काम अपना
मुबारक अज़ीमाबादी
रहने दे अपनी बंदगी ज़ाहिद
बे-मोहब्बत ख़ुदा नहीं मिलता
मुबारक अज़ीमाबादी

