नौ-गिरफ़्तारी के बाइस मुज़्तरिब सय्याद हूँ
लगते लगते जी क़फ़स में भी मिरा लग जाएगा
मीर हसन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
नौजवानी की दीद कर लीजे
अपने मौसम की ईद कर लीजे
मीर हसन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
नज़र आने से रह गया अज़-बस
छा गया इंतिज़ार आँखों में
मीर हसन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
क़िस्मत ने दूर ऐसा ही फेंका हमें कि हम
फिर जीते-जी पहुँच न सके अपने यार तक
मीर हसन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
रख्खूँ कहाँ मैं अपने परी-ज़ाद को 'हसन'
शीशा जो एक दिल का मिरे है सो चूर है
मीर हसन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं
गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं
मीर हसन
सर को न फेंक अपने फ़लक पर ग़ुरूर से
तू ख़ाक से बना है तिरा घर ज़मीन है
मीर हसन
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

