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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

नौ-गिरफ़्तारी के बाइस मुज़्तरिब सय्याद हूँ
लगते लगते जी क़फ़स में भी मिरा लग जाएगा

मीर हसन




नौजवानी की दीद कर लीजे
अपने मौसम की ईद कर लीजे

मीर हसन




नज़र आने से रह गया अज़-बस
छा गया इंतिज़ार आँखों में

मीर हसन




क़िस्मत ने दूर ऐसा ही फेंका हमें कि हम
फिर जीते-जी पहुँच न सके अपने यार तक

मीर हसन




रख्खूँ कहाँ मैं अपने परी-ज़ाद को 'हसन'
शीशा जो एक दिल का मिरे है सो चूर है

मीर हसन




सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं
गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं

मीर हसन




सर को न फेंक अपने फ़लक पर ग़ुरूर से
तू ख़ाक से बना है तिरा घर ज़मीन है

मीर हसन